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बशीर बद्र की स्मृति में श्रद्धांजलि एवं काव्यांजलि गोष्ठी आयोजित

झालावाड़, 2 अगस्त। अंजुमन तरक़्क़ी-ए-उर्दू, झालावाड़ (राजस्थान) के तत्वावधान में उर्दू साहित्य के युगप्रवर्तक, प्रख्यात एवं लोकप्रिय शायर स्वर्गीय बशीर बद्र की स्मृति में श्रद्धांजलि एवं काव्यांजलि गोष्ठी का आयोजन नुसरत साहब की कोठी, सुभाष कॉलोनी, झालावाड़ में गरिमापूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कबीर साहित्यकार श्री राकेश कुमार नैयर ने की। मुख्य अतिथि श्री सुरेश चंद्र निगम, अध्यक्ष, अखिल भारतीय साहित्य परिषद, झालावाड़ रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, झालावाड़ के भूगोल विभागाध्यक्ष प्रो. हमीद अहमद तथा इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. इक़बाल फ़ातिमा उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम का संचालन अंजुमन तरक़्क़ी-ए-उर्दू, झालावाड़ के अध्यक्ष डॉ. फहीमुद्दीन टोंकी ने किया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि बशीर बद्र ने अपनी सहज, संवेदनशील और जनभाषा से जुड़ी शायरी के माध्यम से उर्दू साहित्य को नई दिशा प्रदान की। उनकी ग़ज़लों ने भाषा और साहित्य की सीमाओं को पार कर देश-विदेश के पाठकों के दिलों में स्थायी स्थान बनाया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री राकेश कुमार नेयर ने बशीर बद्र को भारतीय सांस्कृतिक समन्वय और गंगा-जमुनी तहज़ीब का प्रतिनिधि शायर बताया। मुख्य अतिथि श्री सुरेश चंद्र निगम ने कहा कि बशीर बद्र की शायरी मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, करुणा और जीवन-दर्शन की अद्भुत अभिव्यक्ति है। प्रो. हमीद अहमद एवं डॉ. इक़बाल फ़ातिमा ने भी उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
काव्य गोष्ठी में श्री धनीराम समर्थ, श्री कृष्ण सिंह खड़ा, श्री चेतन शर्मा, श्री तुलसीराम तुलसी, श्री भवानी शंकर वर्मा, श्री दानिश अहमद, श्री गर्वित विजय, श्री राम हेतार, श्री शामी अहमद( पिडावा), श्री सचिन, श्री शैलेन्द्र जैन,गुनगुना, श्री जगदीश सोनी तथा श्री हरिश्चंद्र शर्मा कवित्री आफरीन नाज सना फातिमा साहब सहित अनेक कवियों एवं साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं का प्रभावशाली पाठ कर स्वर्गीय बशीर बद्र को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
कार्यक्रम में अंजुमन तरक़्क़ी-ए-उर्दू के सचिव श्री यूनुस खान की सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम की संपूर्ण व्यवस्थाओं का सफल संचालन एवं समन्वय कवयित्री आसमा बहार ने किया।
अंत में कवयित्री समा बाहर ने सभी अतिथियों, कवियों, साहित्यकारों एवं उपस्थित श्रोताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बशीर बद्र की साहित्यिक विरासत सदैव नई पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी। कार्यक्रम का समापन दो मिनट का मौन रखकर तथा स्वर्गीय बशीर बद्र को सामूहिक श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुआ।

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